आखिर जिम्मेदार कौन? प्रशव के दौरान महिला की मौत

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आखिर जिम्मेदार कौन? प्रशव के दौरान महिला की मौत
आखिर जिम्मेदार कौन? प्रशव के दौरान महिला की मौत

राजा तिवारी
चमोली
..फिर शासन प्रशासन और सरकार की संवेदनहीनता ने एक जिंदगी को आखरी पड़ाव पर धकेल दिया। कर्णप्रयाग में प्रशव के दौरान महिला की मौत के बाद कई सवाल उठे हैं

कौन है ज़िम्मेदार? सियासत, सिस्टम या हमारी सहने की आदत? या हमारे बंट जाने की प्रवृत्ति?

……हो सकता है आज कुछ लोगों को सोचने या इसे देखने की भी जरूरत महसूस नहीं हो, लेकिन ये पहला वाकया नही जब ऐसा हुआ। ………ये बार बार हर बार हो रहा है, कभी डाक्टर की अनदेखी से, कभी डाक्टरों की कमी से लेकिन अपने परिवार को देहरादून और इन दिक्कतों से दूर रखने वाले जन प्रतिनिधियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि उनका कोई इन दिक्कतों से नहीं गुजरता।
वो तो खाना पूर्ति के लिए व्यवस्था के नाम पर यँहा कुछ लोगों को भेजते हैं। उसके बाद उनके चारण उनकी तारीफ में जुट जाते हैं। लेकिन आज या जब कोई ऐसा हादसा होता है तो क्या कोई जन प्रतिनिधि ज़िम्मेदारी लेने को आगे आता है नही!
क्योंकि जाने वाला उनका अपना नहीं! और इस पूरे प्रपंच में आखिर में जनता को हासिल होती हैं। अपनों की लाशें।

……तो सवाल ये ही है कि कब तक ये यूँ ही चलता रहेगा?

क्या अब हम जागेंगे या फिर और मौतों का इंतज़ार करेंगे? क्या सियासत के इन सौदागरों को पूछेगा कोई की आखिर वो सियासत के झगड़े में इन मौतों की ज़िम्मेदारी तय करेंगे या अपने राजनैतिक आकाओं की परिक्रमा करते हुए इन मौतों को भूल जाओगे?

हम और हमारी व्यवस्था ऐसी कई बहनों, माताओं और अन्य लोगों की मौत के ज़िम्मेदार हैं। जरूरत है कि अब सवाल हो हर उस व्यक्ति से जो व्यवस्था के सुधार का दावा कर सियासत और सिस्टम का हिस्सा बना है।

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