अविभावक की भूमिका सिर्फ स्कूली जरूरतों को पूरा करने तक सीमित क्यों

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अविभावक की भूमिका सिर्फ स्कूली जरूरतों को पूरा करने तक सीमित क्यों
अविभावक की भूमिका सिर्फ स्कूली जरूरतों को पूरा करने तक सीमित क्यों

विनोद रावत की कलम से
गोपेश्वर- शिक्षा की गुणवत्ता एवं बच्चों का विकास शिक्षकों की जिम्मेदारी है। इसमें अविभावकों को भी इस जिम्मेदारी में भागीदारी करनी होगी। तभी बच्चों का सर्वागीण विकास संभव है। यह विचार उत्तराखंड पब्लिक स्कूल के प्रबंधक फकीर सिंह रावत ने शिक्षा गोष्ठी में कही।
उत्तराखंड पब्लिक स्कूल में विद्यालय प्रबंधन द्वारा अायोजित गोष्ठी में अविभावकों , शिक्षकों में छात्रों के भविष्य व मार्गदर्शन को लेकर एक दूसरे पर आश्रित या जिम्मेदारी की भावना नहीं बल्कि प्रतिदिन संवाद का माध्यम होना चाहिए। गोष्ठी में जिला प्रेस क्लब के महामंत्री गोविंद सिंह रावत का कहना है कि अविभावक छात्र के भविष्य का मार्गदर्शन का माध्यम सिर्फ शिक्षक को मानता है। यह गलत भी नहीं है लेकिन नौनिहालों की पहली पाठशाला घर है ऐसे में अविभावकों को भी अपने बच्चों के प्रति सिर्फ फीस या स्कूली आवश्यकताओं तक सीमित न होकर उनपर ध्यान देना होगा। इस अवसर पर प्रधानाचार्य अरूणा रावत , सलाहकार शिव सिंह नेगी सहित कई लोगों ने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर शिक्षक अविभावक संघ का गठन कर अध्यक्ष कविता नेगी, सदस्य योगिता मैखुरी , सचिव एचएस नेगी बनाए गए। निर्णय लिया गया कि यह संघ शिक्षक अविभावक की भूमिका को लेकर कार्य करेगा।

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