देवभूमि का मश्तक चमोली : वाह क्या खूब नाम कमाया हमने , ऐसे हुए देश के सौ जिलों में सुमार

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सीमांत चमोली जिला देवभूमि उत्तराखंड का मश्तक है लेकिन देवियां यहां सुरक्षित नहीं है । यह सवाल अब देश के जनता के सामने हैं। कम लिंगानुपात को लेकर देश के 100 जिलों में चमोली भी शामिल है। देवभूमि में देवियों का अकाल एक ऐसा सवाल है जिसका जबाब चमोली को देश के परिदृय में देना होगा। जिस प्रकार देश के 100 जिलों में चमोली का नाम भी आया यह हमारे लिए सोचनिय प्रश्न है। ऐसे में सभी की जिम्मेदारी होती है कि बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओ नारा नहीं बल्कि हकीकत में भी हो। इसकें लिए सभी को प्रयास कर आगे आने होगी। तथा बेटा बेटियों का भेद मिटाकर समानता की मानसिकता का संदेश देना होगा
संपादक

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बेटी बचाओ बेटी पढाओ’ योजना के अन्तर्गत जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की बैठक जिलाधिकारी आशीष जोशी की अध्यक्षता में जिला कार्यालय सभागार में संपन्न हुई। जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान का व्यापक प्रचार प्रसार कर लोगों को जागरूक करते हुए बाल लिंगानुपात को संतुलित करने पर जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढाओं अभियान का उदेश्य बेटा-बेटी में भेदभाव की मानसिकता समाप्त करना, कन्या भू्रण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकना, बेटी को स्कूल शिक्षा के लिए भर्ती करना, ड्राॅप आउट न होने देना, बेटियों के स्वास्थ्य, उच्च शिक्षा व रोजगार के अवसर देना, उनके विरूद्व शारीरिक हिंसा पर कठोरता से कारवाई करना शामिल है।जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य, शिक्षा एवं बाल विकास विभागों को योजना के क्रियान्वयन के लिए विभाग से संबधित कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने दूरदराज के गांवों, ग्रामीण महिलाओं, स्कूली छात्राओं पर विशेष फोकस करते हुए योजना का प्रचार प्रसार कर लोगों में जागरूकता लाने की बात कही। उन्होंने जिला स्तरीय टास्कफोर्स की तर्ज पर खण्ड विकास अधिकारी की अध्यक्षता में विकास खण्ड स्तरीय टास्कफोर्स समिति का गठन करने तथा टास्कफोर्स में स्वजल, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, समाज कल्याण, कोषागार एवं ज्यूडिशियल अधिकारियों को भी शामिल करने के निर्देश दिये।जिलाधिकारी ने बेटी बचाओ बेटी पढाओं अभियान के सफल संचालन के लिए ग्राम प्रधान, क्षेत्र एवं जिला पंचायत सदस्यगणों, ब्लाक प्रमुखों, जिला पंचायत व नगर निकायों के अध्यक्षगणों सहित समस्त जनप्रतिनिधियों एवं मीडिया से सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी की सहभागिता से लोगों को जागरूक कर जिले में बाल लिंगानुपात को संतुलित किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने कहा कि 17 से 24 जनवरी तक जिले में बालिका सप्ताह मनाया जायेगा। इस दौरान उन्होंने समस्त विकास खण्डों में बालिका रथ का भ्रमण कराकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिये है। इसके साथ ही 24 जनवरी को जिला पंचायत सभागार में बेटी बचाओं बेटी पढाओ पर आधारित विविध जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कराने को कहा। आंगनबाडी व मिनी आंगनबाडी केन्द्रों पर प्रत्येक माह की 05 व 24 तारीख को बेटी बचाओ बेटी पढाओ पर कार्यशाला का आयोजित कराने के भी निर्देश दिये। विद्यालयों में विभिन्न प्रतियोगिताओं व रैली का आयोजन कर लोगों को जागरूक करने को कहा। बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना के प्रति प्रतिबद्वता व संकल्प हेतु महत्वपूर्ण कार्यालयों में फ्लैक्स बोर्ड लगाकर हस्ताक्षर अभियान चलाने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने कम लिंगानुपात वाले 10 ग्राम पंचायतों में दो ग्राम समन्वयक की नियुक्ति करने के भी निर्देश दिये ताकि ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण की रिपोर्ट तथा संचालित गतिविधियों का बेहतर तरीके से सर्वेक्षण हो सके। जिलाधिकारी ने 15 जनवरी को जिला स्तरीय एवं विकास खण्ड स्तरीय टास्कफोर्स की संयुक्त रूप से बैठक आयोजित कराने के निर्देश भी जिला कार्यक्रम एवं बाल विकास अधिकारी को दिये है।जिला कार्यक्रम एवं बाल विकास अधिकारी संजय गौरव ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना के अन्तर्गत भारत में कम लिंगानुपात वाले 100 जिलों का चयन किया गया है, जिसमें चमोली जनपद भी शामिल है। जनपद में लिंगानुपात 1000 पुरूषों पर 889 है, जो कि चिताजनक है।बैठक में जिला विकास अधिकारी आनंद सिंह, कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एनके सिन्हा, डीपीआरओ बीएस दुग्ताल, टीओ दीपक भट्ट, गोमती प्रयाग जन कल्याण परिषद् भकुण्डा से एसपी बहुगुणा, सेक्रेटरी रूद्रा रिसर्च एण्ड डेवलमेंन्ट से डीपी शैली, समूह समन्वयक मातवर सिंह बिष्ट, एटी इण्डिया बैरागना से सिन्धु खन्तवाल, जशोदा सेमवाल व मन्जू राणा, जाखेश्वर शिक्षण संस्थान से अनीता रावत, शिक्षा विभाग से अनूप खण्डूडी व नरेन्द्र सिंह खत्री आदि उपस्थित थे।

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