देश में एकमात्र मंदिर जहां होते हैं शिव के मुख के दर्शन

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गोपेश्वर
अगर आपको भगवान शिव के मुख दर्शन करने हैं तो चमोली आ जाइए। भारतवर्ष में चमोली जिले के रुद्रनाथ में भगवान शिव का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान शिव के मुख दर्शन होते हैं। इसके बाद एशिया में पशुपतिनाथ में ही भगवान शिव के मुख दर्शनों का लाभ श्रद्धालुओं को मिल सकता है।मंदिर के कपाट 19 मई को ब्रह्म मूर्हत में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं
समुद्र तल से 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है भगवान रुद्रनाथ का पौराणिक मंदिर। प्रतिवर्ष छह माह तक इस मंदिर के कपाट खुलते हैं। छह माह शीतकाल के दौरान भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में विराजित होती है। कपाट खुलने के बाद रुद्रनाथ धाम तो शीतकाल में कपाट बंद होने के बाद गोपीनाथ मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के साक्षात दर्शन होते हैं। इस मंदिर में भगवान शिव की एकानन रूप में पूजा अर्चना की जाती है। भगवान शिव के संपूर्ण शरीर की पूजा नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में होती है। रुद्रनाथ मंदिर के निकट हिमाच्छादित चोटियां यहां के आकर्षण को चार चांद लगाती है।
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ये है मान्यता
-रुद्रनाथ के बारे में मान्यता है कि पांडव काल में भगवान शिव पांडवों को अपना दर्शन नहीं देना चाहते थे। भगवान शिव छिपने के लिए हिमालय में आ गए। पांडवों ने उनकी खोज की तो उन्हें हिमालय में शिव मिल गए। चूंकि भगवान शिव अपने संपूर्ण भाग के दर्शन पांडवों को नहीं देना चाहते थे। लिहाजा उन्होंने पंचकेदारों में अलग अलग स्थानों पर पांडवों को अपने शरीर के अलग अलग हिस्सों के दर्शन िदए। चतुर्थ केदार रुद्रनाथ में उन्होंने पांडवों को मुख दर्शन दिए थे।
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ऐसे पहुंचे
रुद्रनाथ पहुंचने के लिए उत्तराखंड के ऋषिकेश से गोपेश्वर तक वाहन सेवा उपलब्ध है। यहां से तीन किमी की दूरी पर भी सगर गांव तक स्थानीय वाहनों से पहुंचा जा सकता है। सगर गांव से 19 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़कर रुद्रनाथ पहुंचा जा सकता है।
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क्या है सुविधाएं
रुद्रनाथ धाम में हालांकि मंदिर समिति का धर्मशाला है। मगर यहां सीमित संख्या में श्रद्धालु ठहर सकते हैं। श्रद्धालु अपने साथ टेंट ले जाकर यहां रह सकते हैं। सगर गांव से रुद्रनाथ में घोड़े खच्चरों के माध्यम से यात्री पहुंच सकता है।
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यात्रा का समय
वैसे तो मई माह में रुद्रनाथ धाम के कपाट खुलते हैं। इस दौरान यहां की यात्रा शुरू हो जाती है। परंतु अगस्त, सितंबर महीने में रुद्रनाथ पैदल मार्ग व यहां के बुग्यालों में रंग बिरंगे फूल खिले रहते हैं। तब यहां बर्फ भी पिघल जाती हैं। उस दौरान यहां की सुंदरता देखते बनती है।
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