धाैली गंगा घाटी का ऋषिकुंड ट्रैक हुआ पर्यटकाे से गुलजार “कुंड” में पडी जलवायु परिवर्तन की छाया

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संजय कुंवर जाेशीमठ
जाेशीमठ क्षेत्र की धाैली गंगा घाटी के उच्चहिमालयी खूबसूरत ट्रैक ऋषिकुंड( 4225मी०)इस वर्ष भी अपनें प्राकृतिक नजाराें और विश्वधराेहर नन्दादेवी सेंचुरी की  हिमांच्छदित पर्वत चाेटियाें सहित तिब्बत मानसराेवर तक की चाेटियाें के दीदार के चलते पूरे वर्ष देशी विदेशी पर्यटकाें के आकर्षण का केंन्द्र बनती जा रही है,सुराईथाेटा- भल्ला गांव सूकी के ठीक ऊपर के उच्च हिमालयी बुग्याल घांघरकूडी के ऊपर पहाडी पर स्थित इस खूबसूरत ताल के दीदार के लिये अब पर्यटकाें काे अगस्त माह से पूर्व ही यहां पहुचना हाेगा क्याेंकि ऋषिकुंड का क्रिस्टल जल अब धीरे धीरे रूपकुंड की तरह कम हाेता जा रहा है,वर्तमान समय में इस सराेवर से पानी बिल्कुल समाप्त हाे गया है और यहां महज पानी के निंशान रह गये है,बताया जा रहा कि यह उच्चहिमालयी क्षेत्राें में पड रहे जलवायु परिवर्तन का प्रभाव है,वहीं वहीं स्थानीय लाेगाें की मानें ताे वर्ष 2005तक यहां सराेवर खूब पानी से लबालब भरा रहता था जाे अब कम हाेता जा रहा और अब ताे विंटर तक सब सूख जाता है,यहां कई वर्षाे से पथाराेहण करनें आनें वाले पर्यटक दलाें के साथ गाईड के रूप में कार्य कर रहे स्थानीय बदरी भट्ट बताते है कि दरअसल यह ताल यहां ग्लेशियराें के पानी पर निर्भर है अब ग्लेशियर समय से पहले ही पिघल जा रहे और बर्फबारी भी पहले जैसी नही हाे रही और अप्रैल से लेकर मानसून तक यहां सराेवर में पानी रहता है और बाद में पानी सूख जा रहा जिसके चलते यहां पर्यटकाें काे कैम्पिंग कराना मुमकिन नही हाे रहा है, बावजूद इसके यहां ऋषिकुंड से पर्यटक हिमालय काे बेहद करीब से देखकर सबकुछ भूल जा रहे है, वनविभाग सिर्फ यहां के रूट पर पैदल घाेडा मार्ग दुरस्त कर दे ताे पर्यटकाें एंव सामान ढाेंने वाले घाेडे खच्चराें काे आसानी से ऋषिकुंड तक आवाजाही कराई जा सकेगी,स्थानीय टूर आपरेटर महावीर राणा कहते है कि कुंड में पानी कम हाेने के कुछ भी कारण हाे लेकिन यह ट्रैक पिछले कुछ सालाें से देशी ही नही वरन विदेशी खासकर यूराेपीय पर्यटकाें की पहली पसंद बनता जा रहा कारण ये कि यहां एक ताे यहां का वातावरण ही बेहद शुकून दायी है पर्यटकाें की सीमित तादात है यहां ताे दूसरा यह अकेला ऐसा रूट है जहां से आप नन्दादेवी सेंचुरी काे बेहद करीब से अनुभव कर ईनर जाेंन के सभी पीक काे नजदीक से देख सकते है और तिब्बत घाटी तक के पहाडाें का आनन्द आप अपने कैम्प से ही उठा सकते है,यहां से नन्दादेवी नेशनल पार्क के तहत आनें वाली पर्वत चाेटियाे में मुख्यत: राेंठी सडल,बिथार टाेली हिंवाल,देवस्थान,मृगथूनी,त्रिशूली,नन्दाकाेट,नन्दादेवी,ताे द्राेणागिरी रैंज की हनुमान पीक,द्राेणागिरी,ऋषिपहाड़,हरदेओल,गरुड़,सहित तिब्बत बार्डर से सटी उर्जा और त्रिज्या पर्वत चाेटियाें के दीदार हाेते है और धरांसी पास लाताखर्क सहित खूबसूरत ईकाे पर्यटन गांव ताेलमा का नजारा दिखता है,बता दें कि जिस तरह से क्वारीपास ट्रैक रूट में बढती पर्यटकाें की तादात से गाेरसाें,चाेन्या,ताली,चित्रखांना,खुलारा गैलगढ,सहित क्वांरी बुग्याल की वहन क्षमता पर प्रभाव पड रहा है और नरम मखमली बुग्यालाें के ईकाे सिस्टम में बदलाव आ रहा है,ऐसे में क्वांरीपास से पर्यटकाें का भार कम करनें के लिये ऋषिकुंड ट्रैक एक अच्छा और बेहतर विकल्प बन सकता है,पानी की कमी के बावजूद जिस तरह ऋषिकुंड सजधार ट्रैक पर इसबार पर्यटकाें का सैलाब उमडा है ये एक शुभ संकेत है,अब वाे दिन दूर नही जब ऋषिकुंड ट्रैक देशी विदेशी पर्यटकाें की जुबां पर छाया रहेगा जरूरत है एक प्रयास की आपकी और हमारे साथ वन विभाग की,

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